शनिवार, 19 दिसंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

जिन्दगी में न कभी ..!!!

जिन्दगी में न कभी ,इतने मजबूर हुए,
जबसे जनाब हमसे से दूर हुए ।

मिलता है इक पल सकूं दिल को ,

फकत तेरे इश्क में बदनाम जरूर हुए ।

उनको क्या पता ,अपनी मुहब्बत का ,

दर्दे -दिल की दवा ,जो मेरे हजूर हुए ।
हो जाएगी जख्मों की ,भरपाई ,
जिन जख्मों की वजह से मशहूर हुए .।

बस ऐसा न हो ,छोड़ दो बीच राह में ,

निभाना वादे जो हमको मंजूर हुए ।

''कमलेश'' इंतजार में जी लेना नही काफी ,

जब सपनों के टुकड़े भी चूर-चूर हुए ॥

4 comments:

M VERMA ने कहा…

हो जाएगी जख्मों की ,भरपाई ,
जिन जख्मों की वजह से मशहूर हुए .।
जख्म भी अक्सर मश्हूर कर देता है
बेहतरीन रचना

Devendra ने कहा…

आपका ब्लाग बेहद खूबसूरत है..

JHAROKHA ने कहा…

बहुत सुन्दर भावों की अच्छी प्रस्तुति----।

Rajiv Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर! बार बार पढने को मन करता है.