सोमवार, 21 सितंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

अनजाने में छु ....!!!


अनजाने में छू गया था हाथ तेरा ,
पल को लगा मिल गया साथ तेरा


दिल ही तो है इसका क्या करें ,
मिलो तो होता होगा, क्या हाल मेरा

ये ख्याल मुझे जीने नही देता ,
मिली तो क्या होगा सवाल तेरा ?


कटने को तो कट रही है जिन्दगी ,
क्यूँ की मेरे पास है जो रुमाल तेरा


ऐसे बेदर्द तो नही हो" कमलेश" ,
की जेहन में आए ख्याल मेरा

6 comments:

Pankaj Mishra ने कहा…

सुन्दर रचना आभार आपका

मीनू खरे ने कहा…

जी बढ़िया लिखा है. बधाई.

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

अनजाने में छू गया था हाथ तेरा ,
पल को लगा मिल गया साथ तेरा

बहुत सुन्दर...

ओम आर्य ने कहा…

atisundar .......shabd our bhaaw behad khubsoorat

Apoorv ने कहा…

क्यूँ की मेरे पास है जो रुमाल तेरा ।
बहुत खूबसूरत बहाना ढ़ूढ़ा आपने..जीने का ;-)

Harkirat Haqeer ने कहा…

अनजाने में छू गया था हाथ तेरा ,
पल को लगा मिल गया साथ तेरा ।


waah....!!

Kamlesh ji har she'r lajwaab hai kiski tarif karun aur kiski n karun ....!!