सोमवार, 7 सितंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

मंजर ..!!

मंजरे -श्मशान ! ने


सबको रुला दिया,


जिसको जन्मा था कोख से,


उसी ने जला दिया

2 comments:

ओम आर्य ने कहा…

बहुत खुब

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

भाव की गहरायी सोचने पर मजबूर कर देती है।
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