रविवार, 23 अक्तूबर 2011 | By: kamlesh chander verma

दीपावली की शुभ कामनाएं !!!!!


क्या ?झिलमिल करते दीपक आपस में बतियाते हैं ,
सब कहीं उजाला क्यूँ नही ,सब के लिये जले जाते हैं ,

कहीं बिछी है लक्ष्मी- कहीं दरिद्रता की छाया है ,
ये कुदरत की माया है ,या मानव ने खुद बनाया है ,

कहीं फूटते लड़ी -पटाखे कहीं फूटती मन की पीड़ा ,
कहीं पर बच्चे रोये लेने , नये लेना कपड़ा -लीरा,

किसी की खातिर दीपों वाली, नई जीवन की बेला है ,
पर देखें दूजा पहलू ,जहाँ किस्मत का ही मेला है ,

ईश्वर से यही प्रार्थना ,शांति हो दुनिया भर में ,
खुशियों के दीप जलें, गली कूचो और हर घर में ,

कमलेश ,'माँ लक्ष्मी के पूजन का शुभ महूर्त है ,
माँ 'जाएँ हर -उस घर में जहाँ इनकी बहुत जरूरत है



2 comments:

कविता रावत ने कहा…

कमलेश ,'माँ लक्ष्मी के पूजन का शुभ महूर्त है ,
माँ 'जाएँ हर -उस घर में जहाँ इनकी बहुत जरूरत है ॥
..bahut sundar sandesh ke saath saarthak prastuti..
aapko bhi deep parv kee haardik shubhkamnayen!

अनुपमा पाठक ने कहा…

ईश्वर से यही प्रार्थना ,शांति हो दुनिया भर में ,
खुशियों के दीप जलें, गली कूचो और हर घर में ,
sundar bhaav!