शनिवार, 22 अक्तूबर 2011 | By: kamlesh chander verma

मन में हो उल्हास तो ....!!!


मन में हो उल्हास तो जीवन उत्सव मनाता है ,
अवसाद हो किसी कोने में तो उदास हो जाता है ,

कौन सा वो अधजला सवाल उठा था सीने में ,
जिसकी जलन से वह बदहवास हो जाता है !

इसे शिकवा नही हुआ कभी अपने -बेगानों से
कौन दगा देगा पहले ही अहसास हो जाता है ,

ढेर साजिशें तारी हैं इन जमाने की हवाओं में ,
शुक्र है इनका वक्त से पहले पर्दाफास हो जाता है !

उनको गिला रहेगा हमेशा , इस बात का अभी ...
जिसको करते रहे वो दूर ,वो और पास हो जाता है ?

'कमलेश '' जो रखें अपनों को अपने में समेट कर ,
ऐसा अहसास अपनों का बिलकुल खास हो जाता है

1 comments:

S.N SHUKLA ने कहा…

सुन्दर सृजन के लिए बधाई स्वीकारें.

समय- समय पर मिले आपके स्नेह, शुभकामनाओं तथा समर्थन का आभारी हूँ.

प्रकाश पर्व( दीपावली ) की आप तथा आप के परिजनों को मंगल कामनाएं.