शनिवार, 17 अप्रैल 2010 | By: kamlesh chander verma

पर उपदेश कुशल बहुतेरे !! .. कमलेश


बाटों खुशियाँ इस जीवन में,
कल को किसने देखा है;

यही सत्य है इस जीवन का,
बाकी तो सब धोखा है ;

सत्कर्मों का उद्यम कर लो,
दुष्कर्मों से दूर रहो;

मृत्यु के तुम भय को त्यागो,
जीवन से भरपूर रहो;

कर्मों से किस्मत को मोड़ो,
उस पर ही विश्वास करो;

दीन-हीन की सेवा में ही ,
तीरथ गंगा घाट करो;

स्वर्ग नर्क की परिभाषा को,
निजकर्मों से बदलो तुम ;

कर्म हमारा भाग्य बनाते
जैसा मर्जी लिख लो तुम

अग्रज श्री '
'समीर लाल ''जी दुवारा सम्पादित ....

2 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया संदेश..लय कहीं कहीं अटकती है.

kase kahun?by kavita. ने कहा…

बाटों खुशियाँ इस जीवन में,

कल को किसने देखा है;



यही सत्य है इस जीवन का,

बाकी तो सब धोखा है ;


bilkul sahi darshan hai jeevan ka....