बुधवार, 7 अक्तूबर 2009 | By: kamlesh chander verma

खूब खिलाओ खूबपिलाओ

खूब खिलाओ खूब पिलाओ,खुश होता इन्सान ,दिन भर खूब भूखों मरो खुस होता भगवान

भूखे रह करो भजन ,मन में हो खूब श्रद्धा ,इस प्रकार की भक्ति की ,है अपने यहाँ प्रथा

आज घर -घर जग मगा रही सुन्दरता की जोत ,सुहागिनों का है परम पर्व ''करवा चौथ ''


पूरे वर्ष जिनका रहा ''कमलेश ''इक छत्र राज ,इक दिन के लिए उनका छिन जाएगा आज

आज पती परमेश्वर होगा ,उसकी होगी पूजा ,आज -२तक ठीक है ,दिन आवे दूजा

2 comments:

आमीन ने कहा…

achha likh ahai sir... badhai


http://dunalee.blogspot.com/

ओम आर्य ने कहा…

बहुत बहुत ही सुन्दर भाव .......बधाई!