मंगलवार, 6 दिसंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

वक्त तू ही बता ...!!!


ए वक्त तू ही बता दे ,ये तुने क्या किया ,
यादों को समेटने का ,भी वक्त ना दिया

कर लेते गुजरा हम यूँ ही ,'
चले हो तुम 'इशारा भी ना किया

सही -सलामत देख मुस्करा रहे हो तुम ,
बाद तेरे न पूछा 'मैं ' कैसे जिया

आंच न आये कोई ज़माने की तेरे ऊपर ,
तेरी उलझनों को खुद अपने उपर लिया है

तू बे-रहम बे-मुरव्वत है सुना था कभी ,
मगर तुने सब मेरे ही साथ क्यों किया

''कमलेश'कद्र करें वक्त की हमेशा सभी ,
क्यूँ की वक्त ने मौत को न वक्त दिया ॥