गुरुवार, 29 अप्रैल 2010 | By: kamlesh chander verma

निगाहों में तेरी सूरत ..!!


आज भी तेरी प्यारी सूरत निगाहों में बसी है ,
लगाई थी जो प्यार की मेहंदी , हाथों में रची है !

सुर्ख होठों पर सजी मोहक सी ,मुस्कान तेरी ,
लगे ऐसे गुलाबों में लड़ी, मोती की फंसी है !

जो भी देखे तेरी उडती ,जुल्फों का नजारा ,
लगे बदली बादलों की, लहरों में फंसी है !

तेरी वो कातिल अदा बना देती, मुझे दीवाना ,
पागल करने की मुझे जैसे, तूने कमर कसी है !

तेरे चेहरे की मासूमियत और, तेरा भोलापन ,
हर वक्त यह याद करने में ''कमलेश ''की ख़ुशी है !!

3 comments:

'उदय' ने कहा…

सुर्ख होठों पर सजी मोहक सी ,मुस्कान तेरी ,
लगे ऐसे गुलाबों में लड़ी, मोती की फंसी है !

.....बहुत सुन्दर !!!!

बी एस पाबला ने कहा…

तेरी वो कातिल अदा बना देती, मुझे दीवाना ,
पागल करने की मुझे जैसे, तूने कमर कसी है !

बहुत खूब!

Udan Tashtari ने कहा…

वाह वाह! बहुत खूब जी...