सोमवार, 14 सितंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

होश करो

आने वाली है वह घड़ी ,जिसकी नही नेताओं को पड़ी ,,
जब ड्रैगन उपर चढ़ दहाडेगा ,
भारत
माँ का आंचल फाडेगा ,

दुहरायी जायेगी क्या ,सन ६२ की गाथा ,
बाद में ये हम फ़िर पीटेंगेअपना माथा .,
उससे पहले होश करो ,
चीनियों
को खामोश करो ,

अंदर से भी खतरा है ,
बाहर
भी सन्नाटा पसरा है ,

समझो दो इस पडोसी को ,
कुछ
समझे इस खामोसी को ,,

बहुत बन लिए हम महान ,
अब
खोलो बहरों के कान ,

'कमलेश'ये समझे एक ही भाषा ,
खीच
के मारो 1000 तमाचा

5 comments:

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

KHEENCH KE MARO 1000 TAMACHA PAR HUM ME TO BAHUT shanshakti hai itane jaldi thode hi marne pe utarenge.

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर रचना !!

Udan Tashtari ने कहा…

सटीक!!

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.

जय हिन्दी!

कमलेश वर्मा ने कहा…

जोगलेकर जी ,नमस्ते ,आपकी संसय अपनी जगह ठीक है, पर कब तक इक झूठी दुनिया में जिएँगे, की हम एक शक्ति के रूप में उभर रहें हैं ??

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

बहुत खूब .. हैपी ब्लॉगिंग