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शनिवार, 7 नवंबर 2009 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

रहना था तेरे...!!!

रहना था तेरे शहर में ,

इरादे बदल गये । .

मुझ पर ये इल्जाम क्यूँ ?,

तेरे वादे बदल गये

जिन्दगी गुजरने की ख्वाहिस ,

दिल में थी मेरे ,

साथ- साथ चले थे ये क्या ?रस्ते बदल गये

ढूढेंगे जिन्दगी को जाके कहीं और ,

निशां तो अभी बाकी है ,

गर कारवां उजड़ गये ,।

कमलेश कैसे यकीं हो तेरी बात पर ,

जहाँ शहंशाह बदला नही ,प्यादे बदल गये