
हसरतों को जहाँ रोज, मरते-बेहाल देखा है ,
बे-मतलब अपना चेहरा, लाल करते देखा है ।
जो करके आये हैं , उसका उनको ख्याल है,
मै तो था बे-कसूर .!ये मलाल करते देखा है ।
करें भी क्या इनके बस में, है भी नही ,
यादों के नश्तरों को, हलाल करते देखा है ,।
कुछ ने तो कर लिया वक्त से समझौता ,
कुछ बिना वजह हमेशा बवाल करते देखा है ।
जो नही दे पाते अपने आप को उत्तर ,
उसे औरों से सौ सवाल ? करते देखा है ।
''कमलेश'' यहाँ की दुनिया बड़ी अजीब है ,
कुछ को रोते हुए ,कुछ को धमाल करते देखा है ॥
{सेंट्रल जेल में ड्यूटी के दौरान लिखे थे यह शब्द ''कैदियों की मानसिकता ''}