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रविवार, 18 अप्रैल 2010 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

जेल में पढ़े जो चेहरों के भाव ...!!!


हसरतों को जहाँ रोज, मरते-बेहाल देखा है ,
बे-मतलब अपना चेहरा, लाल करते देखा है ।

जो करके आये हैं , उसका उनको ख्याल है,
मै तो था बे-कसूर .!ये मलाल करते देखा है ।

करें भी क्या इनके बस में, है भी नही ,
यादों के नश्तरों को, हलाल करते देखा है ,।

कुछ ने तो कर लिया वक्त से समझौता ,
कुछ बिना वजह हमेशा बवाल करते देखा है ।

जो नही दे पाते अपने आप को उत्तर ,
उसे औरों से सौ सवाल ? करते देखा है ।

''कमलेश'' यहाँ की दुनिया बड़ी अजीब है ,
कुछ को रोते हुए ,कुछ को धमाल करते देखा है ॥


{सेंट्रल जेल में ड्यूटी के दौरान लिखे थे यह शब्द ''कैदियों की मानसिकता ''}