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सोमवार, 23 जुलाई 2012 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

दर्द को हंस कर ...!!!

कैसे बताऊँ उस दर्द को जो नासूर हो गया ,
दर्द को हंस कर सहने को , दिल मजबूर हो गया ।

वक्त अपनी ही चाल से कैसे,वक्त काट देता है यहाँ ,
वक्त जिसे समझे थे एक, उसको भी बाँट देता हैं यहाँ ।

दर्द को भी दर्द होता होगा जरूर एक बार जिन्दगी में ,
जब कोई दर्द बिछुड़ता होगा , उसकीअपनी जिन्दगी से ।

ना
हो उनको कोई अहसास ,कोई हमें फ़िक्र नही ,
कहीं अहसास ही ना ख़त्म हो जाये, बस फ़िक्र है यही ।

''कमलेश'' गुजारिस हैं कोई ना बदले रिश्तों के रूप को ,
लगे ना नजर किसी की , रिश्तों की चमकती धूप को .