
- थी चांदनी तारों के आगोश में ,देख!चाँद जल गया !
- जलन भी थी इतनी तेज, सूरज भी पिघल गया !
- तपिस तेरे मेरे प्यार की, पहुंच गयी कूंचों तक !
- बारास्ता जो भी गुजरा इधर से ,वो भी मचल गया !
- ऐसा नही की विरानियाँ ही हैं, इस राहे-गुजर में ,
- जो भी आया दर-ए-इश्क में ,गाता ग़ज़ल गया !
- यहाँ इतनी आसां नही होती ,राहें चाहत की ,
- कुछ तो सीधे चलते चले गये ,कोई फिसल गया !
- 'कमलेश'शुक्रिया कैसे अदा करुँ मै उसका ,
- जिसके प्यार के सहारे ,आखिर सम्भल गया !!
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जलन -यह -कैसी -जलन ..!!!
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