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गुरुवार, 7 जनवरी 2010 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

मुझ नाचीज को मिला ये;;!!

मुझ नाचीज को मिला ये, प्यार कैसा है
जो हो मन को ,ऐतबार जैसा है

चाँद गया हो मुट्ठी में ,
हुआ सपना साकार जैसा है

सोचा भी नही था, कभी ऐसा भी होगा
कल्पना
में अब भी सूक्ष्म आकार जैसा है

हकीकत में हुई है,स्नेह की वर्षा ,
मेरे लिये ये प्यार खुमार जैसा है

परिस्करण ,उत्साहवर्धन ले जावूँ आपका साथ में ,
आप लोगों की तरफ से ,उपहार जैसा है

काश रह पाता ''कमलेश'' आपके संग ,
गुनी जनों का सानिध्य पुरस्कार जैसा है