कहने को सब यहाँ,अपने खास -म खास ,
रिश्ते हैं ये मतलब के बाकी सब बकवास ॥
मतलब हो तो ''तुम ''भी ''आप '' होजाता है ,
नही तो रिश्ता रिसते-रिसते रिस जाता है ॥
मतलब होतो खून का कोई नही है भेद ,
नही तो अपना खून भी हो जाय सफ़ेद ॥
मतलब हो तो दिख जाए हो चाहे जितनी दूर ,
पलकों के नीचे न दिखे ,लाख कोशिस करो हजूर ॥
'' कमलेश'' मतलब से न करो ,प्यार प्रेम परिहास ,
मत ''लब '' खोलो फालतू ,जहाँ हो अति विस्वास ॥
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अपने ही देश...मन का दर्द ..!!!
अपने ही देश में बेगाने हो गये हैं ,
यहाँ के लोग रुपय्या हम आने हो गए हैं ,
जिनकी मेहनत से है इनकी मूछ ऊँची ,वही
इनकी नजरों में बेमाने हो गए हैं ,
इन्सान ही इन्सान को कमतर है आंकता ,
इनके औरों के लिए अलग पैमाने हो गए हैं ,
साथ-२ होने का जो दम भरते ,,
सबसे अधिक भेदभाव यही करते ,
कसूर है उन सरकारों का,
जो नही रख पाती ख्याल बे-रोजगारों का ॥
क्षेत्र वाद के मारे ये अंधे हो गये हैं ,
जिनकी थी भी दो आँखें,
,''कमलेश ''वो भी काने हो गए हैं ॥
यहाँ के लोग रुपय्या हम आने हो गए हैं ,
जिनकी मेहनत से है इनकी मूछ ऊँची ,वही
इनकी नजरों में बेमाने हो गए हैं ,
इन्सान ही इन्सान को कमतर है आंकता ,
इनके औरों के लिए अलग पैमाने हो गए हैं ,
साथ-२ होने का जो दम भरते ,,
सबसे अधिक भेदभाव यही करते ,
कसूर है उन सरकारों का,
जो नही रख पाती ख्याल बे-रोजगारों का ॥
क्षेत्र वाद के मारे ये अंधे हो गये हैं ,
जिनकी थी भी दो आँखें,
,''कमलेश ''वो भी काने हो गए हैं ॥
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