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बुधवार, 4 नवंबर 2009 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

कहने को सब यहाँ...!!!!

कहने को सब यहाँ,अपने खास - खास ,
रिश्ते हैं ये मतलब के बाकी सब बकवास

मतलब हो तो ''तुम ''भी ''आप '' होजाता है ,
नही तो रिश्ता रिसते-रिसते रिस जाता है

मतलब होतो खून का कोई नही है भेद ,
नही तो अपना खून भी हो जाय सफ़ेद

मतलब हो तो दिख जाए हो चाहे जितनी दूर ,
पलकों के नीचे दिखे ,लाख कोशिस करो हजूर

''
कमलेश'' मतलब से करो ,प्यार प्रेम परिहास ,
मत ''लब '' खोलो फालतू ,जहाँ हो अति विस्वास
बुधवार, 23 सितंबर 2009 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

अपने ही देश...मन का दर्द ..!!!

अपने ही देश में बेगाने हो गये हैं ,

यहाँ के लोग रुपय्या हम आने हो गए हैं ,



जिनकी मेहनत से है इनकी मूछ ऊँची ,वही

इनकी नजरों में बेमाने हो गए हैं ,



इन्सान ही इन्सान को कमतर है आंकता ,

इनके औरों के लिए अलग पैमाने हो गए हैं ,



साथ- होने का जो दम भरते ,,

सबसे अधिक भेदभाव यही करते ,


कसूर है उन सरकारों का,

जो नही रख पाती ख्याल बे-रोजगारों का



क्षेत्र वाद के मारे ये अंधे हो गये हैं ,

जिनकी थी भी दो आँखें,

,''कमलेश ''वो भी काने हो गए हैं