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रविवार, 4 अक्टूबर 2009 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

कच्ची दीवार समझ कर...!!!




समझ कर दीवार कच्ची ठोकर न लगाना मुझको ,

नज़रों मेंअपनी बसा कर न गिराना मुझको !


तुमको आँखों में ख्वाबों की तरह रखता हूँ ,

दिल में धडकन की तरह तुम भी बसाना मुझको ।


बात करने में जो मुश्किल हो तुम्हे महफिल में ,

मैं समझ जाऊँगा नज़रों से बताना मुझको !


वादा उतना ही करो जितना निभा सकते हो ,

खवाब पूरा जो न हो वो न दिखाना मुझको !


रिश्ते की नजाकत का भ्रम रख लेना '',कमलेश''

मैं तो आशिक हूँ पागल न बनाना मुझको !


समझ करदीवार कच्ची ठोकर न लगना मुझको ,

अपनी नज़रों में बसा कर न गिराना मुझको
!