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बुधवार, 27 जनवरी 2010 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

बादलों में छुपकर...!!


बादलों में छुपकर चाँद खो गया ,
थपकी दी पवन ने चाँद सो गया ।

झिलमिल सितारों की सुनहरी रात है,
दे गयी अपने मिलन की सौगात है ।

खुली पलकों से तेरे सपने देखती आँखें ,
तेरी लहराती जुल्फों के सपने देखती आँखें ।

जवां रात की अंगड़ाई में खिला योवन ,
चांदनी के जलाल में घुला-मिला योवन।

छुपा लो इस कयामत को इस रात में ,
कहीं सब कुछ भूल न जावूँ जज्बात में ।

'कमलेश' नहीं भूल पाता हूँ उस बात को ,
जो धीरे से कानो में कही थी उस रात को ॥