बुधवार, 14 सितंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

जय हो हिंदी मार्तु-भाषा की ....!!!


हिन्दी से सबको सबसे, हिन्दी को है पूरी आशा ,
फले-फूले दिन-रात चौगुनी ,जन-मानस की भाषा

इसमें निहित है हमारे पूरे , देश राष्ट्र -धर्म की मर्यादा ,
जितना इसका मंथन होता ,बढ़े ज्ञान अमृत और ज्यादा

बदल रहें इसके कार्य -क्षेत्र ,बदल रही सीमा परिभाषा,
आभाषी मन मचल रहे हैं ,ले एक नयी उर में जिज्ञाषा ,

इसमें समाहित है महा-कुम्भ ,रस, श्रृंगारों,भावों और छंदों का ,
हर शंकाओं-आशंकाओं का समाधान ,मन के अन्त्रद्व्न्धों का

हर भाषा है महान देश के साहित्यिक -गौरव की समृधि है ,
'कमलेश' पर हर भाषा की सिरमौर ,मार्तु -भाषा ''हिन्दी'' है ॥...

4 comments:

Patali-The-Village ने कहा…

आपको हिंदी दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं|

संजय भास्कर ने कहा…

हिंदी दिवस पर
बहुत ही रोचक और विश्लेष्णात्मक पोस्ट
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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जय हिंद जय हिंदी राष्ट्र भाषा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर!
--
हिन्दी भाषा का दिवस, बना दिखावा आज।
अंग्रेजी रँग में रँगा, पूरा देश-समाज।१।

हिन्दी-डे कहने लगे, अंग्रेजी के भक्त।
निज भाषा से हो रहे, अपने लोग विरक्त।२।

बिन श्रद्धा के आज हम, मना रहे हैं श्राद्ध।
घर-घर बढ़ती जा रही, अंग्रेजी निर्बाध।३।

रविकर ने कहा…

साढ़े छह सौ कर रहे, चर्चा का अनुसरण |
सुप्तावस्था में पड़े, कुछ पाठक-उपकरण |

कुछ पाठक-उपकरण, आइये चर्चा पढ़िए |
खाली पड़ा स्थान, टिप्पणी अपनी करिए |

रविकर सच्चे दोस्त, काम आते हैं गाढे |
आऊँ हर हफ्ते, पड़े दिन साती-साढ़े ||

http://charchamanch.blogspot.com/