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लोड हो रहा है. . .
कमलेश वर्मा
जिन्दगी चलती जा रही, किस ओर है ,

मिलन इस छोर पर ,बिछुड़ना उस ओर है


सिमट जाएँगी यादें ,जहन में कहीं ,

पूछेगी जिन्दगी, ये कौन सा मोड़ है


खुश हो लेंगे हम ,मिले थे कभी ,

उन खुशनुमा लम्हों का , अहसास बेजोड़ है


क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,

क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है


'
कमलेश' निभा लो जब तलक ,निभे दोस्ती ,

जिंदगी जीने की वजह ,तो कुछ और है
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3 Responses
  1. M VERMA Says:

    क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,
    क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है ।
    बहुत सुन्दर


  2. सिमट जाएँगी यादें ,जहन में कहीं ,

    पूछेगी जिन्दगी, ये कौन सा मोड़ है ।

    क्या खूब कहा जनाब आपने। लाजवाब लगी आपकी रचना


  3. क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,

    क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है ।
    सुन्दर रचना


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