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कमलेश वर्मा
कहूँ मै क्या ?दिल उदास है ,
कोई ऐसी बात मौका खास है

कोने में कहीं दिल के किसी ,
इक उलझा -उलझा सा अहसास है

किसे समझूं यहाँ अपना ,
तोड़ देता हर कोई विश्वाश है

कसम से पड़ता इस अजाब में ,
हो गया सकूने -दिल का नाश है

फ़िर भी शुक्र है खुदा का ,
टुकडा टूटे दिल का मेरे पास है

'कमलेश' मिल जाएगा ही कोई,
अपना कोई कोई हमराह है
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Reactions: 
4 Responses
  1. M VERMA Says:

    फ़िर भी शुक्र है खुदा का ,
    टुकडा टूटे दिल का मेरे पास है ।
    शुक्र है अवशेष तो शेष है
    बहुत सुन्दर रचना


  2. Suman Says:

    nice.........nice....................nie...................


  3. अच्‍छी रचना। क्‍या करे यहाँ भी दिल उदास है।


  4. कसम से न पड़ता इस अजाब में ,
    हो गया सकूने -दिल का नाश है

    bahut sundar !!


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